.
जयपुर। राज्य के प्रत्येक जिले में एक या दो प्रमुख मंदिर एवं धार्मिक स्थलों को चिन्हित कर उनका जयपुर खोले के हनुमान जी मंदिर की तर्ज पर विकास किया जायेगा। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में देवस्थान विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए इस बारे में निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आस्था के इन केन्द्रों पर श्रद्घालुओं एवं पर्यटकों की सुविधा के लिये पार्किंग, आवागमन, आवास सहित अन्य सुविधाओं को भी विकसित किया जायेगा। उन्होंने देवस्थान विभाग की किराया नीति, सुपुर्दगी नीति व खनिज नीति की समीक्षा कर इसे बेहतर बनाने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना की कमियों को दूर करने के लिये मध्यप्रदेश पैटर्न का अध्ययन कर उसके अनुरूप तीर्थयात्रियों के लिये इसमें सुधार किये जाये। बैठक में यह तय किया गया कि ज्योतिष, पूजापाठ व कर्मकाण्ड के अध्ययन के लिये आदि शंकराचार्य बोर्ड का गठन कर इसका संचालन जगद्गुरू रामानन्दचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के माध्यम से कराया जायेगा।विभाग की ओर से 60 दिवसीय योजना में राज्य के 200 से अधिक मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों में रंगाई-पुताई व मरम्मत का कार्य एवं धार्मिक गतिविधियों का कैलेण्डर तैयार करने सहित अन्य कार्य चिन्हित किये गये हैं।

इस अवसर पर मुख्य सचिव  राजीव महर्षि, अतिरिक्त मुख्य सचिव देवस्थान  अशोक शेखर, प्रमुख शासन सचिव वित्त  सुभाष गर्ग, प्रमुख शासन सचिव राजस्व  तपेश पंवार, आयोजना सचिव  अखिल अरोरा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
Axact

HINDU ASTHA

हमारी कोशिश आपको सही बात पहुंचाने की है .

Post A Comment: