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दीपोत्सव 2025- शुभ मुहूर्त, विधि, साधना और मुहूर्त -लेखक – पंकज ओझा, धर्म ध्वजावाहक,



 स्थिर वृष लग्न में करें लक्ष्मी-गणेश पूजन, अर्धरात्रि में सिंह लग्न का तांत्रिक महत्व


लेखक – पंकज ओझा, धर्म ध्वजावाहक, 

ज्योतिष एवं सांस्कृतिक विश्लेषक (जयपुर)



 प्रकाश, समृद्धि और श्रद्धा का पर्व-


दीपावली केवल दीपों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है।

यह दिन माँ लक्ष्मी के आगमन का, श्री गणेश की कृपा का और जीवन में नए आरंभ का पर्व माना गया है।

इस वर्ष दीपावली का त्योहार 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाया जाएगा।

और इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण यह पर्व अत्यंत शुभ संयोग लेकर आएगा।



  दिवाली पूजन के शुभ मुहूर्त (जयपुर अनुसार)


मुख्य लक्ष्मी पूजन मुहूर्त:

  शाम 7 बजकर 8 मिनट से रात 8 बजकर 18 मिनट तक

यह समय स्थिर वृष लग्न का है, जो लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।


निशिता काल मुहूर्त:

 रात 11:41 से 12:31 बजे तक, जो अर्धरात्रि पूजा और तांत्रिक साधना के लिए अत्यंत शुभ है।


प्रदोष काल:

 शाम 5:36 से रात 8:07 बजे तक

इसमें वृषभ लग्न 6:59 से 8:56 बजे तक रहेगा —

यह काल धन, सौभाग्य और परिवारिक समृद्धि के लिए अत्यंत अनुकूल है।



  धनतेरस 2025 के शुभ मुहूर्त (जयपुर)-


धनतेरस की पूजा और खरीदारी के लिए सबसे शुभ समय —

  18 अक्टूबर 2025 को शाम 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक।


इस समय भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।


अन्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:-


लाभ-उन्नति मुहूर्त: शाम 5:48 से 7:23 बजे तक


शुभ-उत्तम मुहूर्त: रात 8:57 से 10:32 बजे तक


अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: रात 10:32 से 12:06 बजे तक



धनतेरस की तिथि 18 अक्टूबर दोपहर 12:18 बजे से 19 अक्टूबर दोपहर 1:51 बजे तक रहेगी।

इसलिए श्रद्धालु अपनी सुविधा अनुसार इन मुहूर्तों में खरीदारी या पूजन कर सकते हैं।


  दिवाली के दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति-


नक्षत्र: स्वाति

योग: वज्र (साहस और स्थिरता देने वाला)

चंद्र राशि: तुला — जो मां लक्ष्मी का प्रिय स्थान है।

लग्न: वृष (स्थिर लग्न – धन एवं समृद्धि का प्रतीक)।


इन ग्रह संयोजनों के कारण इस बार की दिवाली को “धन वृद्धि” और “भाग्य उदय” का पर्व कहा गया है।


  लक्ष्मी पूजन विधि (पारंपरिक क्रम में)-


1. प्रातःकाल स्नान कर घर की पूर्ण सफाई करें, फिर गंगाजल का छिड़काव करें।

2. मुख्य द्वार पर रंगोली और आम-पत्रों का तोरण लगाएं।

3. लाल कपड़े से सजी चौकी पर लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्तियाँ स्थापित करें।

4. कलश में गंगाजल भरें और चौकी के पास रखें।

5. देवी-देवताओं को वस्त्र समर्पण कर तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें।

6. फल, मिठाई, बताशे, सिक्का, नारियल और पान अर्पित करें।

7. घी के दीपक जलाएं, घर के प्रत्येक कोने में 21 दीपक रखें।

8. पहले गणेश जी की आरती, फिर लक्ष्मी माता की आरती करें।

9. पूजा के अंत में देवी से क्षमा मांगें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।



 पूजन सामग्री


माँ लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा

कलावा, वस्त्र, शहद, गंगाजल, फूल, फूलमाला, सिंदूर, पंचामृत

बताशे, इत्र, चौकी, लाल वस्त्र, कलश

शंख, आसन, थाली, चाँदी का सिक्का, कमल पुष्प

हवन सामग्री, आम के पत्ते, प्रसाद

रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल), पान, सुपारी, नारियल

मिट्टी के दीए और रुई की बाती।



 लक्ष्मी पूजन मंत्र-


ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः


ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः


धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च। भगवान् त्वत्प्रसादेन धनधान्यादिसम्पदः॥


ॐ श्रीं श्रीयये नमः।



इन मंत्रों का 108 बार जाप कर दीपमालाओं के बीच श्रद्धा से पूजन करने से घर में सुख, सौभाग्य और धनवृद्धि होती है।



  दीपावली का आध्यात्मिक संदेश


दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं है — यह आत्मा के भीतर के अंधकार को मिटाने का संदेश देती है।

जब हम अपने भीतर के द्वेष, अहंकार और आलस्य को जलाते हैं, तभी सच्चा “दीपोत्सव” होता है।


 “जिस घर में दीप जलता है, वहाँ न केवल अंधकार मिटता है,

बल्कि मन और विचारों का कोना-कोना भी आलोकित हो उठता है।”



  त्योहारी कैलेंडर — दीपोत्सव सप्ताह 2025


पर्व तिथि वार प्रमुख मुहूर्त / योग


धनतेरस 18 अक्टूबर 2025 शनिवार शाम 7:16 – 8:20 बजे (मुख्य पूजन)


नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली 19 अक्टूबर 2025 रविवार प्रदोषकाल 5:45 – 8:05 बजे


दीपावली (लक्ष्मी पूजन) 20 अक्टूबर 2025 सोमवार शाम 7:08 – 8:18 बजे, स्थिर वृष लग्न


गोवर्धन पूजा 21 अक्टूबर 2025 मंगलवार सुबह 6:50 – 9:00 बजे


भाई दूज 22 अक्टूबर 2025 बुधवार सुबह 10:00 – दोपहर 12:30 बजे




      लेखक: पंकज ओझा, 

       धर्मध्वजा वाहक

ज्योतिष एवं सांस्कृतिक विश्लेषक (जयपुर)

(स्रोत: भारतीय पंचांग, पारंपरिक शास्त्र व स्थानीय ज्योतिषीय गणनाएँ)

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