आज के समय में समाज सेवा की बातें तो बहुत लोग करते हैं, लेकिन अपने संकल्प को कर्म में बदलने वाले लोग बहुत कम दिखाई देते हैं। ऐसे दौर में अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन के संस्थापक एवं मुख्य संरक्षक रतन कुमार शर्मा ने जो संदेश और संकल्प समाज के सामने रखा है, वह केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य को संवारने का दृढ़ संकल्प है।
हाल ही में कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ब्राह्मण समाज के 177 मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन छात्रवृत्ति प्रदान की। छात्रवृत्ति की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जा रही है। लेकिन इससे भी बड़ी बात उनका वह संकल्प है, जिसमें उन्होंने आगामी तीन वर्षों के भीतर ब्राह्मण समाज के बच्चों की शिक्षा के लिए ₹5 करोड़ की प्रोत्साहन छात्रवृत्ति सीधे उनके हाथों तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
यह कोई पहली पहल नहीं है। इससे पहले सिलीगुड़ी, गुवाहाटी और तिनसुकिया के 502 मेधावी विद्यार्थियों को कुल ₹35,59,900 की छात्रवृत्ति सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जा चुकी है। यह बताता है कि रतन कुमार शर्मा केवल वादे नहीं करते, बल्कि उन्हें पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ निभाते भी हैं।
शायद यही संघर्ष आज उनके भीतर समाज के प्रति सेवा का ऐसा भाव जगाता है, जो केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि यह छात्रवृत्ति केवल कुछ रुपये नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के आत्मविश्वास पर उनका विश्वास है। यह संदेश है कि कोई भी प्रतिभाशाली बच्चा अकेला नहीं है—उसके साथ पूरा समाज खड़ा है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे पूरी लगन और मेहनत से पढ़ाई करें, इतिहास रचें और सफलता के शिखर पर पहुँचकर अपने माता-पिता तथा पूरे ब्राह्मण समाज का नाम रोशन करें। उनका विश्वास है कि जब समाज के बच्चे आगे बढ़ेंगे, तभी समाज वास्तव में सशक्त बनेगा।
आज समाज को ऐसे ही लोगों की आवश्यकता है, जो केवल मंचों से प्रेरणादायक भाषण न दें, बल्कि अपने संसाधनों, समय और संकल्प को समाज के उत्थान में समर्पित करें। रतन कुमार शर्मा की यह पहल उन सभी सक्षम लोगों के लिए एक प्रेरणा है, जो समाज के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं, लेकिन किसी कारणवश अभी तक आगे नहीं आए हैं।
यदि समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति एक बच्चे की शिक्षा का दायित्व भी अपने ऊपर ले ले, तो न जाने कितनी प्रतिभाएँ आर्थिक अभाव के कारण रुकने से बच जाएँगी। शिक्षा केवल एक व्यक्ति का जीवन नहीं बदलती, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बदल देती है।
रतन कुमार शर्मा का यह संकल्प केवल छात्रवृत्ति देने का अभियान नहीं है, बल्कि यह विश्वास जगाने का प्रयास है कि समाज की वास्तविक शक्ति उसके शिक्षित, आत्मविश्वासी और संस्कारित युवाओं में निहित होती है। ऐसे प्रयास निस्संदेह समाज सेवा की नई परिभाषा गढ़ते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनते हैं।
समाज को ऐसे सेवाभावी व्यक्तित्वों पर गर्व होना चाहिए। उनकी यह पहल केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि संघर्ष कर रहे विद्यार्थियों के सपनों को पंख देने का अभियान है। आशा है कि उनकी यह सोच और सेवा-भावना अन्य सक्षम लोगों को भी प्रेरित करेगी, ताकि अधिक से अधिक प्रतिभाशाली बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बन सके और समाज शिक्षा के माध्यम से नई ऊँचाइयों को प्राप्त करे।



