जयपुर। हिंदू धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण का विशेष पर्व माने जाने वाला श्राद्ध पक्ष आज, 26 सितंबर शनिवार से शुरू हो रहा है। श्राद्ध पक्ष की शुरुआत पूर्णिमा के श्राद्ध से होगी। इस दौरान परिवारजन अपने दिवंगत पूर्वजों का उनकी मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध पक्ष पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने और उनका स्मरण करने का विशेष अवसर है। जिन पूर्वजों का देहांत पूर्णिमा तिथि को हुआ हो, उनके निमित्त आज पूर्णिमा का श्राद्ध किया जाता है। परिवार अपनी परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं।
तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व
श्राद्ध के दौरान पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्रद्धापूर्वक पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में पूर्वजों का स्मरण कर उनके निमित्त किए गए धार्मिक कर्म परिवार में पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को प्रकट करते हैं।
कई परिवार इस अवसर पर ब्राह्मण भोजन, जरूरतमंदों को भोजन एवं दान तथा गौ सेवा जैसे धार्मिक कार्य भी करते हैं। श्राद्ध कर्म की विधि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में प्रचलित परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है।
आज से शुरू होगा तिथिवार श्राद्ध
पूर्णिमा श्राद्ध के बाद 27 सितंबर को प्रतिपदा का श्राद्ध होगा। इसके बाद प्रतिदिन संबंधित तिथि के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाएगा। श्राद्ध पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को अमावस्या के श्राद्ध के साथ होगा।
श्राद्ध पक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और परिवार की परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
