शारदीय नवरात्र का सातवां दिन जगतजननी मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप 'मां कालरात्रि' को समर्पित है। मां दुर्गा का यह रूप अत्यंत भयंकर दिखने वाला अवश्य है, लेकिन अपने भक्तों के लिए यह हमेशा शुभ फलदायी होता है, इसीलिए इन्हें 'शुभंकरी' भी कहा जाता है। इनकी उपासना से साधक के जीवन के सभी भय, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त हो जाती हैं।
कौन हैं मां कालरात्रि? (स्वरूप)
मां कालरात्रि का स्वरूप आदिशक्ति के सबसे प्रचंड और तेजवान रूपों में से एक है:
वर्ण व रूप: इनका शरीर अंधकार की तरह काला है, बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत के समान चमकने वाली माला है।
सवारी: मां कालरात्रि का वाहन गर्दभ (गधा) है।
भुजाएं: इनकी चार भुजाएं हैं। दाहिने ऊपर वाले हाथ से मां सभी को अभय प्रदान करती हैं (अभय मुद्रा) और नीचे वाला हाथ वरद मुद्रा में है। बाएं हाथ में लोहे का कांटा (अंकुश) और खड्ग (तलवार) सुशोभित है।
मां कालरात्रि का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व
भय और संकट का नाश: मां कालरात्रि की साधना से साधक निर्भय बनता है। भूत-प्रेत, अग्निभय, जलभय, शत्रु भय और अंधकार से जुड़े सभी डर इनकी कृपा से दूर हो जाते हैं।
शनि ग्रह का नियंत्रण: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां कालरात्रि की पूजा विशेष रूप से कुंडली में शनि ग्रह के दुष्प्रभावों और शनि दोष को शांत करने के लिए अचूक मानी जाती है।
साहस और पराक्रम की प्राप्ति: इनकी आराधना से मानसिक दृढ़ता बढ़ती है और व्यक्ति हर कठिन परिस्थिति का सामना करने में सक्षम होता है।
सप्तम दिवस की पूजन विधि (क्रमबद्ध प्रक्रिया)
प्रातः स्नान व वस्त्र: प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इस दिन स्लेटी / ग्रे (Grey) या लाल रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ और मां को प्रिय माना जाता है।
पूजा स्थल की शुद्धि: मंदिर की साफ-सफाई कर गंगाजल छिड़कें। चौकी पर मां कालरात्रि की मूर्ति या तस्वीर स्थापित कर सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
पुष्प व श्रृंगार अर्पित करें: मां को रोली, अक्षत, सिंदूर और लाल रंग के पुष्प (विशेषकर गुड़हल या रात्रिराणी के फूल) अर्पित करें।
प्रिय भोग: मां कालरात्रि को भोग के रूप में गुड़ (Jaggery) या गुड़ से बनी चीजों का प्रसाद अत्यंत प्रिय है। ब्राह्मणों को गुड़ का दान करना भी शुभ माना जाता है।
आरती व पाठ: दुर्गा सप्तशती के सातवें अध्याय का पाठ करें, मां के सिद्ध मंत्रों का जाप करें और अंत में कपूर या दीपक से आरती संपन्न करें।
मां कालरात्रि के सिद्ध मंत्र और प्रार्थना
पूजा के समय इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें:
ध्यान मंत्र:
एकवेणी जपाकर्णकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता,
लम्बोष्टिकोर्णिनी कर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,
वर्धन्मूूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
मूल मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्रै नमः॥
प्रणाम मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
नोट: मां कालरात्रि की सच्ची श्रद्धा से पूजा करने वाले भक्त को अष्टसिद्धि और नवनिधि की प्राप्ति होती है। आप सभी पर मां कालरात्रि की असीम कृपा बनी रहे!
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लेखक: [पंकज ओझा RAS ,धर्म ध्वजा रक्षक]
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