शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप 'मां शैलपुत्री' की आराधना की जाती है। हिमालय राज (पर्वतराज) की पुत्री होने के कारण इन्हें 'शैलपुत्री' कहा गया। नवरात्रि स्थापना के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ ही घटस्थापना (कलश स्थापना) कर नौ दिवसीय शक्ति साधना का भव्य शुभारंभ होता है।कौन हैं मां शैलपुत्री? (स्वरूप)
मां शैलपुत्री का स्वरूप
अत्यंत भव्य, सौम्य और शांत है।सवारी: मां शैलपुत्री वृषभ (बैल) पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें 'वृषारूढ़ा' भी कहा जाता है।
अस्त्र-शस्त्र: इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित होता है।
सद्गुण: यह प्रकृति, दृढ़ता और स्थिरता की प्रतीक मानी जाती हैं।
मां शैलपुत्री का आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं।
मूलाधार चक्र का प्रतीक: योग साधना में मां शैलपुत्री का संबंध शरीर के 'मूलाधार चक्र' से है। नवरात्र के पहले दिन साधक अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करके साधना का आरंभ करते हैं।
इच्छाशक्ति और स्थिरता: मां शैलपुत्री की आराधना से जीवन में स्थिरता, दृढ़ इच्छाशक्ति, धैर्य और साहस का आगमन होता है।
कष्टों से मुक्ति: पौराणिक मान्यता है कि देवी शैलपुत्री पूर्व जन्म में सती थीं। इनकी उपासना से साधक के जीवन से भय, रोग, और मानसिक अशान्ति दूर होती है।
प्रथम दिन की पूजन विधि (क्रमबद्ध प्रक्रिया)
प्रातः स्नान व संकल्प: नवरात्र के पहले दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो नारंगी या लाल वस्त्र) धारण करें। तत्पश्चात व्रत का संकल्प लें।
घटस्थापना (कलश पूजन): ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें सप्तधान्य या जौ बोएं। इसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं, उसमें आम के पत्ते, सिक्का, सुपारी डालें और नारियल पर लाल वस्त्र लपेटकर स्थापित करें।
मां का आह्वान: घटस्थापना के बाद चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा/शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
अंग-पूजन व श्रृंगार: मां शैलपुत्री को रोली, अक्षत, कुमकुम, सिंदूर, और सफेद/लाल पुष्प (विशेषकर चमेली या कनेर) अर्पित करें।
प्रिय भोग: मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध देशी घी या घी से बनी मिठाई (हलवा/मावे का भोग) और सफेद मिष्ठान का भोग अत्यंत प्रिय है।
आरती व दीप: धूप-दीप जलाकर मां शैलपुत्री की कथा पढ़ें या सुनें और अंत में मां दुर्गा की आरती करें।
मां शैलपुत्री के सिद्ध मंत्र
पूजा के समय इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है:
ध्यान मंत्र:
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
मूल मंत्र:
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
प्रणाम मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जय माँ भवानी
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लेखक: [पंकज ओझा RAS ,धर्म ध्वजा रक्षक]
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