सीकर में इन्द्रेश जी महाराज की कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, हरि नाम संकीर्तन पर झूम उठे हजारों श्रद्धालु
सीकर। राजस्थान के सीकर में इन दिनों भक्ति और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। श्री गोविंदम गार्डन में स्व. महेश जी सिंधी की पावन स्मृति में आयोजित महेशम श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अनूठा नजारा देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पूज्य इन्द्रेश जी महाराज के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा का रसपान करने हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। हरि नाम संकीर्तन की धुन पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा कथा पांडाल भगवान के जयकारों से गूंज उठा।
कथा के दूसरे दिन इन्द्रेश जी महाराज ने कपिल चरित्र, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत कथा और अजामिल चरित्र के माध्यम से भक्तों को भक्ति, दृढ़ संकल्प, आत्मज्ञान और भगवान के नाम की महिमा का संदेश दिया। कथा के दौरान भक्ति संगीत और हरि नाम संकीर्तन ने ऐसा भक्तिमय माहौल बनाया कि श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
ध्रुव की अटूट भक्ति और अजामिल के प्रसंग से मिला जीवन का संदेश
इन्द्रेश जी महाराज ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि दृढ़ संकल्प और अटूट श्रद्धा के बल पर असंभव लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। बालक ध्रुव की तपस्या और भगवान के प्रति उनकी अनन्य भक्ति प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणादायी है।
वहीं, अजामिल चरित्र के माध्यम से महाराज ने हरिनाम की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान का नाम मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कपिल चरित्र और जड़ भरत की कथा के जरिए उन्होंने आत्मज्ञान, वैराग्य और सद्मार्ग पर चलने का महत्व समझाया।
इन्द्रेश जी महाराज की बड़ी सीख: बचपन से बच्चों में डालें भक्ति और संस्कार
कथा के दौरान इन्द्रेश जी महाराज ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही भक्ति, धर्म और अच्छे संस्कारों से जोड़ना जरूरी है। भगवान का स्मरण, भजन और कथा श्रवण केवल वृद्धावस्था के लिए नहीं हैं, बल्कि इनकी शुरुआत बचपन से होनी चाहिए।
महाराज ने कहा कि 55 वर्ष की उम्र में भक्ति शुरू करने का विचार करने पर इसे सहज रूप से जीवन में अपनाना कठिन हो सकता है। बचपन से जिस कार्य का अभ्यास किया जाता है, वही संस्कार जीवनभर व्यक्ति के साथ रहते हैं।
उन्होंने कहा कि सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं है और सत्य स्वयं श्रीकृष्ण का स्वरूप है। साथ ही, कथा श्रवण के दौरान मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए श्रद्धालुओं से मोबाइल से दूरी बनाकर कथा में एकाग्रता बनाए रखने का आह्वान किया।
राजस्थान की भक्ति परंपरा और श्रीनाथजी के अनन्य प्रेम का किया वर्णन
इन्द्रेश जी महाराज ने राजस्थान की समृद्ध भक्ति परंपरा का उल्लेख करते हुए अजब कुमारी और श्रीनाथजी के अनन्य प्रेम का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती सदियों से भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना की धरोहर रही है।
सीकर और शेखावाटी क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने भक्ति और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
कथा में पहुंचे पूर्व मंत्री, विधायक समेत अनेक गणमान्य अतिथि
महेशम श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। मीडिया प्रभारी संजय मोर के अनुसार, कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, स्थानीय विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पारिक, निवर्तमान सभापति जीवन खां, पूर्व विधायक राजकुमारी शर्मा, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष पवन मोदी, रामेश्वर रणवा, जितेन्द्र कारंगा, सीए सुनील मोर, किशन सिंह एवं परमेश्वर शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कथा के आयोजक नरेश सिंधी ने सपत्नीक व्यास पीठ पर पहुंचकर पूज्य इन्द्रेश जी महाराज का स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम का मंच संचालन विष्णु पारीक ने किया।
इस अवसर पर दिनेश बियानी, सत्य सोमानी, मनीष काबरा, सुशील मटोलिया, विक्रम सिंह वाहिदपुरा, राहुल तिवाड़ी, कपिल मांगनानी, नरपतसिंह, मुकेश भाटीवाड़ा, गौरव सोमानी, मुरारी बियानी, पवन सोडाणी, संजय शर्मा, सुभाष शर्मा, विजय झाझूका, पायल नारवानी, स्वाति बियानी, सुरुचि सोमानी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
हरि नाम संकीर्तन से गूंजा कथा पांडाल, दिनभर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
कथा के दूसरे दिन सुबह से ही श्री गोविंदम गार्डन में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। कथा, भजन और हरि नाम संकीर्तन के बीच पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा। भगवान के जयकारों और संकीर्तन की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने भक्ति रस का आनंद लिया।
स्व. महेश जी सिंधी की स्मृति में आयोजित यह धार्मिक आयोजन श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दे रहा है। कथा स्थल पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने पूरे आयोजन को भक्ति और उत्साह से सराबोर कर दिया।
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