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नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ 2027: नीलगिरि पर्वत पर संतों ने किया निरीक्षण



अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज के नेतृत्व में प्रमुख संत-महात्माओं ने जूना अखाड़ा परिसर एवं फार्म हाउस का किया निरीक्षण


सभापति श्रीमहंत मोहन भारती जी महाराज, श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज, जगद्गुरु, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, थानापति एवं विभिन्न अखाड़ों के सैकड़ों संत-महात्मा रहे उपस्थित


सिंहस्थ कुंभ सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक एकता एवं विश्व कल्याण का महान महापर्व है : श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज


नीलगिरि पर्वत, त्र्यंबकेश्वर, नासिक (महाराष्ट्र)। रविवार, 1 नवंबर 2026।


महाराष्ट्र की पावन धर्मभूमि नासिक–त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ 2027 की तैयारियों को लेकर रविवार, 1 नवंबर 2026 को देशभर से पधारे प्रमुख संत-महात्माओं ने नीलगिरि पर्वत स्थित श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के परिसर, फार्म हाउस एवं आसपास के क्षेत्रों का व्यापक भ्रमण एवं निरीक्षण किया।



अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक परम पूज्य श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज के पावन नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस निरीक्षण में जूना अखाड़े के सभापति श्रीमहंत मोहन भारती जी महाराज, प्राचीन सिद्धपीठ श्री दूधेश्वरनाथ मठ महादेव मंदिर गाजियाबाद के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज सहित अनेक जगद्गुरु, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत, थानापति एवं वरिष्ठ साधु-संत सम्मिलित हुए।


इस अवसर पर संत समाज ने भगवान त्र्यंबकेश्वर महादेव का स्मरण करते हुए विश्व शांति, राष्ट्र की सुख-समृद्धि, मानवता के कल्याण तथा आगामी सिंहस्थ कुंभ के निर्विघ्न, सफल एवं ऐतिहासिक आयोजन की मंगलकामना की।



 कुंभ की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का लिया जायजा


निरीक्षण के दौरान श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज ने संत-महात्माओं के साथ नीलगिरि पर्वत स्थित जूना अखाड़ा परिसर एवं फार्म हाउस का भ्रमण करते हुए आगामी सिंहस्थ कुंभ के दृष्टिगत उपलब्ध स्थान, संतों के ठहरने की संभावित व्यवस्थाओं, धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं से संबंधित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया।



संत समाज ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सिंहस्थ कुंभ में देश-विदेश से आने वाले संतों, साधु-संन्यासियों, श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमियों को सुव्यवस्थित सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए समय रहते आवश्यक तैयारियाँ की जाएँ।


इस दौरान संतों के आवास, अखाड़ों की व्यवस्थाओं, यज्ञशालाओं, पूजा-अनुष्ठानों, भंडारों, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छता, चिकित्सा सुविधाओं, यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था सहित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।


संतों ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा, संतों की तपस्या, सेवा, त्याग एवं विश्व बंधुत्व की भावना का विराट संगम है। इसलिए इसके आयोजन में धार्मिक मर्यादाओं, अखाड़ों की प्राचीन परंपराओं तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है।



 सिंहस्थ कुंभ भारतीय संस्कृति की महान आध्यात्मिक विरासत : श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज


अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक परम पूज्य श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज ने कहा कि नासिक–त्र्यंबकेश्वर की पावन धरती भगवान शिव की आराधना, तपस्या और सनातन धर्म की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है।


उन्होंने कहा, "सिंहस्थ कुंभ सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक एकता और विश्व कल्याण का महान महापर्व है। यह आयोजन संपूर्ण विश्व को भारत की महान ऋषि-मुनि परंपरा, आध्यात्मिक चेतना तथा मानव कल्याण के शाश्वत संदेश से परिचित कराता है।"


श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज ने कहा कि संत समाज का प्रयास रहेगा कि सिंहस्थ कुंभ में आने वाले प्रत्येक संत और श्रद्धालु को धार्मिक वातावरण के साथ आवश्यक सुविधाएँ प्राप्त हों। इसके लिए अखाड़ों, संत समाज, स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित व्यवस्थाओं के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है।


उन्होंने कहा कि जूना अखाड़ा सदैव सनातन धर्म की रक्षा, भारतीय संस्कृति के संरक्षण, आध्यात्मिक जागरण एवं लोक कल्याण के लिए समर्पित रहा है। आगामी सिंहस्थ कुंभ में भी अखाड़े की गौरवशाली परंपराओं के अनुरूप धार्मिक अनुष्ठान, संत समागम, सेवा कार्य तथा आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान त्र्यंबकेश्वर महादेव की कृपा और संतों के आशीर्वाद से सिंहस्थ कुंभ 2027 ऐतिहासिक सफलता प्राप्त करेगा तथा संपूर्ण विश्व में भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म का गौरव बढ़ाएगा।


सिंहस्थ कुंभ को दिव्य, भव्य एवं अनुशासित बनाना संत समाज का संकल्प : श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज


प्राचीन सिद्धपीठ श्री दूधेश्वरनाथ मठ महादेव मंदिर, गाजियाबाद के पीठाधीश्वर, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष, जूना अखाड़ा 13 मढ़ी के अध्यक्ष, श्री दूधेश्वर वेद विद्यालय के संरक्षक, हिंदू यूनाइटेड फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व शांति संगठन के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री एवं शाश्वत हिंदू के संरक्षक श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज ने बताया कि नीलगिरि पर्वत पर आयोजित इस महत्वपूर्ण निरीक्षण का उद्देश्य आगामी सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों को सुव्यवस्थित दिशा प्रदान करना है।


उन्होंने कहा कि संत समाज के सामूहिक प्रयासों से सिंहस्थ कुंभ 2027 को दिव्य, भव्य, अनुशासित एवं ऐतिहासिक बनाया जाएगा।


श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज ने कहा, "कुंभ मेला भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और संत परंपरा का विश्वव्यापी प्रतीक है। यह केवल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को शांति, सद्भाव, सेवा, त्याग और आध्यात्मिक एकता का संदेश देने वाला महान आयोजन है।"


उन्होंने कहा कि सिंहस्थ कुंभ में देश-विदेश से आने वाले संतों एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। संत समाज की परंपराओं, धार्मिक अनुशासन एवं अखाड़ों की मर्यादाओं को बनाए रखते हुए सभी व्यवस्थाओं को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करना आवश्यक है।


उन्होंने कहा कि भगवान त्र्यंबकेश्वर महादेव की कृपा से यह सिंहस्थ कुंभ संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और विश्व शांति का संदेश प्रसारित करेगा।


नीलगिरि पर्वत पर संत समाज की एकजुटता का दिखा भव्य स्वरूप


निरीक्षण के दौरान नीलगिरि पर्वत पर संत समाज की एकजुटता, परस्पर सहयोग एवं धार्मिक समर्पण का विशेष वातावरण दिखाई दिया।


जूना अखाड़े के सभापति श्रीमहंत मोहन भारती जी महाराज सहित उपस्थित वरिष्ठ संतों ने भी आगामी सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों को लेकर अपने विचार व्यक्त किए तथा संत समाज के बीच आपसी समन्वय, सहयोग एवं धार्मिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।


संतों ने कहा कि नासिक–त्र्यंबकेश्वर का सिंहस्थ कुंभ भारत की महान धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण उत्सव है। इसमें अखाड़ों की प्राचीन परंपराएँ, शाही स्नान की आध्यात्मिक महत्ता, संतों का तपस्वी जीवन, वैदिक अनुष्ठान एवं धार्मिक समागम भारतीय संस्कृति के विराट स्वरूप को प्रकट करते हैं।


संत समाज ने आगामी आयोजन के लिए आवश्यक तैयारियों को समय रहते आगे बढ़ाने तथा व्यवस्थाओं के संबंध में संबंधित पक्षों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने पर भी बल दिया।


प्रमुख संत-महात्माओं की रही गरिमामयी उपस्थिति


इस महत्वपूर्ण भ्रमण एवं निरीक्षण में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक परम पूज्य श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज के साथ प्रमुख रूप से—


- जूना अखाड़े के सभापति श्रीमहंत मोहन भारती जी महाराज

- श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज

- जगद्गुरु वीरभद्रानंद गिरि जी महाराज (मामा सरकार, अहमदाबाद)

- जगद्गुरु त्र्यंबकेश्वर अरुण गिरि जी महाराज

- श्रीमहंत चंद गिरि जी महाराज

- श्रीमहंत पशुपति गिरि जी महाराज

- साध्वी महामंडलेश्वर शारदानंद गिरि जी महाराज

- श्रीमहंत आनंद गिरि जी महाराज

- थानापति श्रीमहंत पट्टी पंजाब

- कामेश्वर आश्रम, त्र्यंबकेश्वर, नासिक के अध्यक्ष

- थानापति महंत नीलकंठ गिरि जी महाराज

- थानापति महंत विष्णु गिरि जी महाराज


सहित विभिन्न अखाड़ों के जगद्गुरु, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत, थानापति, वरिष्ठ गुरुजन तथा सैकड़ों साधु-संत उपस्थित रहे।


सभी संत-महात्माओं ने भगवान त्र्यंबकेश्वर महादेव से प्रार्थना की कि आगामी सिंहस्थ कुंभ निर्विघ्न संपन्न हो, राष्ट्र में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहे तथा संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म के शांति, सद्भाव, सेवा और मानव कल्याण के आदर्शों का प्रसार हो।


संत समाज ने एक स्वर में संकल्प व्यक्त किया कि सिंहस्थ कुंभ 2027 को भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म, संत परंपरा एवं आध्यात्मिक एकता का ऐतिहासिक महापर्व बनाने के लिए सभी मिलकर कार्य करेंगे।


हर हर महादेव! जय श्री त्र्यंबकेश्वर महादेव!