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बिना संगठित हुए समाज का कोई अस्तित्व नहीं है : गुप्ता

पाली। अग्रवाल समाज के भगवान महाराजाधिराज अग्रसेन जी भगवान के अग्रोहा हरियाणा में बन रहे भव्य मंदिर के लिए राशि एकत्रण सहित पूरे देश में अग्रवाल समाज जनों में एकजुटता बने इस उद्देश्य से कुलदेवी मां महालक्ष्मी जी की यात्रा राजस्थान राज्य के 18 जिलों में भ्रमण कर रही है। 

महालक्ष्मी जी की यह यात्रा रविवार को पश्चिमी क्षेत्र अग्रवाल सम्मेलन के अध्यक्ष के के गुप्ता के सानिध्य में जिला पाली के सुमेरपुर क्षेत्र में पहुंची। जहां पर लोकसभा सांसद पीपी चौधरी, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व वरिष्ठ नेता अरुण चतुर्वेदी, सुमेरपुर विधानसभा विधायक, भाजपा जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र जैन सहित कई राजनेताओं की भागीदारी रही। सभी अतिथियों ने मां महालक्ष्मी जी का आशीर्वाद लिया और प्रदेश व देश में सुख समृद्धि की कामना की।

इस अवसर पर समाज जनों को संबोधित करते हुए गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में यह अति आवश्यक है कि अग्रवाल समाज का युवा वर्ग राजनीति के क्षेत्र में भी बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी निभाएं। अग्रवाल समाज की राजनीतिक भागीदारी प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में बहुत कम है। वही समाज की जनसंख्या इतनी है कि वह प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। हम अग्रवाल इतने श्रेष्ठ कुशल दिमाग और धनाढ्य होते हुए भी राजनीति में बहुत पीछे हैं जबकि देश की राजनीति में हमारे समाज का बहुत बड़ा योगदान है। राजनीति में हमारा पीछे रहने का मुख्य कारण हम संगठित नहीं होने के कारण इसका हर्जाना भुगत रहे हैं। अब हमें हर हाल में संगठित होना है जिससे हमारी राजनीति भागीदारी बन सके तथा हम देश के उत्थान के लिए सेवाएं दे सकें। उन्होने कहा कि हम पूरे देश में करीब 8 करोड़ के आस पास रहते हैं तथा देश के कोने कोने में बसे हुए हैं। व्यापार से 80 प्रतिशत लोग जुड़े हुए हैं जो रोजगार देने में भी श्रेष्ठ हैं तथा आमजन से हमारा जोड़ा बहुत ज्यादा है। वह व्यापारिक दृष्टि से तथा हमारे निजी संबंधों से संबंध रखता है। देश की अर्थव्यवस्था में भी हमारा बहुत बड़ा योगदान है। टैक्स जो हम चुकाते हैं उससे सरकारें चलती है तथा सबसे ज्यादा अगर इस देश में शोषण या प्रताडि़त किसी को किया जा रहा है तो वह अग्रवाल समाज है। 
 

उन्होंने कहा कि समाज में प्रत्येक स्तर पर सामाजिकता का अत्यंत अभाव झलक रहा है। आज समाज का हर व्यक्ति समाज के ही दूसरे व्यक्ति का सहयोग नहीं करना चाहता। उन्होंने श्री राम और रावण के युद्ध का वर्णन करते हुए उदाहरण दिया कि जब रावण मृत्यु शैय्या पर था तब रावण ने राम को बताया कि आप युद्ध कैसे जीते? श्री राम के युद्ध जीतने का एक प्रमुख कारक था कि उनके भाई श्री लक्ष्मण सदैव उनके साथ थे उस से बढ़कर प्रकांड पंडित कहलाने वाले रावण का भाई विभीषण भी श्री राम के साथ था। उन्होंने कहा कि एकता का सिद्धांत समाज और राष्ट्र दोनों में खुशी और शांति की भावना फ़ैलाता है और साथ ही साथ दया की सीख भी देता है। वास्तव में यह शब्द ‘एकता’ बिल्कुल उपयुक्त है क्योंकि यह हमारे समाज को परिभाषित करता है जहाँ हम एकता और सद्भाव के साथ रहते हैं। बेशक कई बार हमारे बीच में मतभेद हुए लेकिन हम इस तरह की परिस्थितियों पर विचार-विमर्श और एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने से इन्हें दूर करने में कामयाब रहे।

उन्होंने कहा कि समाज पर हो रहे अत्याचार को गंभीरता से देखना पड़ेगा। आज चोरी डकैती और हम व्यापार जगत से जुड़े हुए लोग हैं। जिनको स्पेक्टर राज परेशान करता है व्यापारी वर्ग की कोई इज्जत नहीं है। व्यापारी की पेंशन की मांग भी हमारे शीर्ष नेतृत्व ने उठाइए इन सब बातों को गंभीरता से लेने के लिए हमें समाज को संगठित करने की आवश्यकता है। राजस्थान में हम सात करोड़ अग्रवाल रहते हैं अगर सभी संगठित हो गए तो हमारा राजनीति में भी बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी हमें मिलेगी और आने वाला समय हमारा होगा और हर हाल में समाज को संगठित करना है समाज को मजबूत बनाना है।

गुप्ता ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हत्या अपहरण जैसे मामलों में ज्यादातर अग्रवाल समाज पीड़ित होता है। इन सब बातों को गंभीरता से लेते हुए हमें समाज के यूथ जो हमारा 95 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के बाद भी बेरोजगार की लाइन में खड़ा रहता है। कहीं ना कहीं सारी अर्थव्यवस्था से हमारा समाज पीड़ित है और ऐसे में जब हमारा समाज पूरे देश के लिए टैक्स के माध्यम से पूरे सरकार को भारी राशि देकर सरकार चलाने में मदद करता है। 

गुप्ता ने बताया कि महाराजा अग्रसेन को समाजवाद का अग्रदूत कहा जाता है। अपने क्षेत्र में सच्चे समाजवाद की स्थापना हेतु उन्होंने नियम बनाया कि उनके नगर में बाहर से आकर बसने वाले प्रत्येक परिवार की सहायता के लिए नगर का प्रत्येक परिवार उसे एक तत्कालीन प्रचलन का सिक्का व एक ईंट देगा, जिससे आसानी से नवागन्तुक परिवार स्वयं के लिए निवास स्थान व व्यापार का प्रबंध कर सके। महाराजा अग्रसेन ने तंत्रीय शासन प्रणाली के प्रतिकार में एक नई व्यवस्था को जन्म दिया, उन्होंने पुन: वैदिक सनातन आर्य सस्कृंति की मूल मान्यताओं को लागू कर राज्य की पुनर्गठन में कृषि-व्यापार, उद्योग, गौपालन के विकास के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की पुन: प्रतिष्ठा का बीड़ा उठाया,इस तरह महाराज अग्रसेन के राजकाल में अग्रोदय गणराज्य ने दिन दूनी- रात चौगुनी तरक्की की। कहते हैं कि इसकी चरम स्मृद्धि के समय वहां लाखों व्यापारी रहा करते थे। वहां आने वाले नवागत परिवार को राज्य में बसने वाले परिवार सहायता के तौर पर एक रुपया और एक ईंट भेंट करते थे, इस तरह उस नवागत को लाखों रुपये और ईंटें अपने को स्थापित करने हेतु प्राप्त हो जाती थीं जिससे वह चिंता रहित हो अपना व्यापार शुरू कर लेता था।

इस अवसर पर राजस्थान अग्रवाल सम्मेलन के महामंत्री राकेश अग्रवाल ने कहा कि अब हमने यह ठाना है कि समाज को हर हाल में संगठित करेंगे और समाज को उसके वास्तविक अधिकार दिलाने के लिए आप सभी के सहयोग की आवश्यकता है और यूथ को हम आगे लाने का संभव ही नहीं हर संभव प्रयास कर भी रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। यूथ अगर आगे आएगा तो निश्चित रूप से हमारा समाज संगठित हो।
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HINDU ASTHA

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