21 जून 2026 – विजय सप्तमी एवं व्यतिपात योग का दुर्लभ दिव्य संयोग 🚩
सनातन धर्म के शास्त्रों में व्यतिपात योग को अत्यंत दुर्लभ, दिव्य एवं महापुण्यदायी योग माना गया है। इस योग में किया गया जप, तप, ध्यान, दान, व्रत, हवन एवं ईश्वर स्मरण सामान्य दिनों की अपेक्षा अनेक गुना अधिक फलदायी माना गया है। विशेष बात यह है कि 21 जून 2026 को शुक्ल पक्ष की विजय सप्तमी तथा व्यतिपात योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
🕉️ व्यतिपात योग का समय
🔹 प्रारम्भ : 21 जून 2026, प्रातः 11:20 बजे
🔹 समाप्ति : 22 जून 2026, प्रातः 10:30 बजे
🌟 महापुण्य काल
22 जून 2026, प्रातः 10:15 बजे से 10:30 बजे तक
यह अंतिम 15 मिनट का काल विशेष रूप से महापुण्यदायी माना जाता है। साधकों को प्रातः 10:00 बजे से ही जप, ध्यान एवं संकल्प की तैयारी प्रारम्भ कर देनी चाहिए तथा 10:15 से 10:30 बजे के मध्य मुख्य साधना, जप, ध्यान, दान एवं संकल्प अवश्य करना चाहिए।
☀️ विजय सप्तमी का अद्भुत महत्व
21 जून 2026 को रविवार, शुक्ल पक्ष एवं सप्तमी तिथि का संयोग होने के कारण यह विजय सप्तमी कहलाती है। शास्त्रों में वर्णित है कि साधारण सप्तमी में किया गया सत्कर्म भी सूर्यग्रहण के समान पुण्य प्रदान करता है, किंतु जब शुक्ल पक्ष में रविवार युक्त सप्तमी आती है तो उसकी महिमा अनेक गुना बढ़ जाती है। कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति के पाप पर्वत के समान भी हों, तो विजय सप्तमी के दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, उपवास, जप एवं पूजा करने से वे भी नष्ट हो सकते हैं।
ब्रह्मपुराण एवं अन्य पुराणों में इसकी महिमा का वर्णन मिलता है। युधिष्ठिर एवं भगवान श्रीकृष्ण के संवाद में युधिष्ठिर पूछते हैं—
"हे देवकीनन्दन! सप्तमी की पूजा किस समय की जाए? उसका फल क्या है और उसके नियम क्या हैं?"
तब भगवान श्रीकृष्ण उत्तर देते हैं—
"शुक्ल पक्ष की सप्तमी जब रविवार को आती है, वह विजय सप्तमी कहलाती है और अत्यंत महाफलदायिनी होती है।"
शास्त्र में कहा गया है—
"सप्तमी विजय नाम तत्र दत्तं महाफलम्।"
अर्थात् विजय सप्तमी में किया गया प्रत्येक शुभ कर्म महाफल प्रदान करने वाला होता है।
⏰ विशेष साधना एवं पुण्यकाल
🔸 21 जून दोपहर 11:20 बजे से रात्रि 06:52 बजे तक
इस काल में किया गया जप, ध्यान, पाठ, स्तोत्र एवं पूजा लगभग 1 करोड़ गुना पुण्यफल प्रदान करने वाला माना गया है।
🔸 21 जून रात्रि 06:52 बजे से रात्रि 10:24 बजे तक
यह अत्यंत प्रभावशाली साधना काल माना गया है, जिसमें जप, तप, हवन, ध्यान एवं दान का लगभग 100 करोड़ गुना पुण्यफल प्राप्त हो सकता है।
🔸 21 जून रात्रि 10:24 बजे से 22 जून प्रातः 10:30 बजे तक
यह काल अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला काल माना गया है। इस अवधि में किया गया जप, शिवपूजन, विष्णुसहस्रनाम, सूर्य उपासना, दान एवं मौन साधना विशेष फलदायी मानी गई है।
✨ इस दिव्य योग में क्या करें?
शास्त्रों में कहा गया है
"स्नानम्, दानम्, जपः, होमः, उपवासः"
अर्थात् इस दिन विशेष रूप से—
🔹 स्नान
🔹 दान
🔹 जप
🔹 हवन (होम)
🔹 उपवास
करना चाहिए।
साथ ही—
▪️ ॐ नमः शिवाय मंत्र जाप
▪️ महामृत्युंजय मंत्र जाप
▪️ गायत्री मंत्र जाप
▪️ आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ
▪️ विष्णु सहस्रनाम पाठ
▪️ शिव अभिषेक एवं रुद्राष्टाध्यायी
▪️ सूर्यदेव को अर्घ्य
▪️ मौन साधना एवं ध्यान
▪️ अन्नदान, वस्त्रदान एवं गौसेवा
विशेष पुण्यदायी माने गए हैं।
📿 विशेष संकल्प
इस दुर्लभ योग में भगवान शिव, सूर्य नारायण, भगवान विष्णु एवं अपने इष्टदेव का स्मरण करते हुए परिवार, समाज एवं विश्व कल्याण का संकल्प लें।
"व्यतिपात योग में किया गया जप-तप, दान, व्रत एवं साधना साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति एवं अक्षय पुण्य का संचय करती है।"
🚩 हर हर महादेव, जय सूर्यनारायण, जय श्री हरि 🙏🚩
पंकज ओझा RAS
🚩धर्मध्वजा रक्षक 🚩
