नवलगढ़। भगवान शिव के अनन्य उपासक, स्वर्गीय बनवारीलाल शर्मा, जिन्हें श्रद्धालु प्रेम से बिलोर महाराज अथवा दयालु जी के नाम से जानते थे, उनकी पुण्य स्मृति में नवलगढ़ पुलिस थाने के पीछे स्थित प्राचीन भूतनाथ महादेव श्मशान धाम में उनकी प्रतिमा का विधिवत अनावरण एवं स्थापना समारोह श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ।
स्वर्गीय बनवारीलाल शर्मा ग्राम सेवक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने सांसारिक पद और प्रतिष्ठा से अधिक भगवान भूतनाथ की सेवा को महत्व दिया। यही कारण रहा कि उन्होंने अपने सेवाकाल में कभी पदोन्नति स्वीकार नहीं की। कहा जाता है कि जब-जब उनका तबादला हुआ, भगवान भूतनाथ की असीम कृपा से वह निरस्त हो गया और वे पुनः अपनी सेवा-स्थली लौट आए। उनका संपूर्ण जीवन भगवान शिव की आराधना, सेवा और साधना को समर्पित रहा।
वे प्रतिदिन भूतनाथ महादेव की भस्म से अलौकिक श्रृंगार सेवा करते थे तथा श्मशान भूमि को ही अपनी तपोभूमि मानकर शिव भक्ति में लीन रहते थे। उनके प्रयासों से यहां एक सुंदर पंचवटी का निर्माण हुआ, जहां उन्होंने अपने पूज्य गुरुदेव की प्रतिमा भी स्थापित करवाई थी।
उनकी इसी आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनके श्रद्धालु कैलाश जी चोटिया, अनिल पारीक एवं उनके परिवार द्वारा गुरुदेव की प्रतिमा के साथ स्वर्गीय बिलोर महाराज की प्रतिमा भी स्थापित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस पावन अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को स्वर्गीय बिलोर महाराज के भतीजे मनीष शर्मा द्वारा काशी विश्वनाथ धाम से लाया गया पवित्र चंदन प्रसाद स्वरूप भेंट किया गया। यह वही दिव्य चंदन है, जो भगवान विश्वनाथ (भगवान शिव) के श्रीचरणों में अर्पित किया जाता है। श्रद्धालुओं ने इसे शिव कृपा का प्रसाद मानकर अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति भाव से ग्रहण किया। इस पावन प्रसाद वितरण ने समारोह को और अधिक आध्यात्मिक एवं सनातन संस्कृति की सुगंध से ओत-प्रोत कर दिया।
इस अवसर पर अनेक समाजसेवियों, धर्मप्रेमियों एवं विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में उनके सुपुत्र ओमी पंडित एवं राजेश शर्मा ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। समारोह में उनके भतीजे मनीष शर्मा, अनिल शर्मा सहित परिवार के अनेक सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं भावपूर्ण संचालन प्रसिद्ध कवि एवं स्वर्गीय बिलोर महाराज के भतीजे हरीश हिंदुस्तानी ने किया।
"जो शिव की भक्ति में स्वयं को समर्पित कर देता है, उसका जीवन ही लोककल्याण की प्रेरणा बन जाता है।"
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