Hindu Astha

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

जीणमाता की कथा में उमड़ा भक्तों का सैलाब, बोले महंत- भक्ति और तपस्या से अवश्य मिलते हैं भगवान


नवलगढ़। जीणमाता की भक्ति में रविवार को नवलगढ़ भक्तिमय नजर आया। बाबा रामदेव मंदिर के पास चल रही जीणमाता की कथा सुनने के लिए नवलगढ़ सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे। कथा के दौरान भक्ति, तपस्या और भगवान शिव-पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।


यूनाईटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित कथा के तीसरे दिन कथावाचक महंत डॉ. करणीप्रताप महाराज ने कहा कि जगदम्बा की कृपा से ही संसार का संचालन हो रहा है। मनुष्य यदि सच्चे मन से आराधना, साधना और तपस्या करे तो भगवान की प्राप्ति संभव है।


तीन हजार वर्ष की तपस्या के बाद मिली शिवजी की प्राप्ति

कथा में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनाते हुए महंत डॉ. करणीप्रताप महाराज ने कहा कि मां पार्वती भगवान शिव की परम भक्त थीं। शिवजी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए उन्होंने वर्षों तक कठोर तपस्या की।


उन्होंने बताया कि माता पार्वती की तपस्या की परीक्षा लेने के लिए सप्तऋषि उनके पास पहुंचे। सप्तऋषियों ने जब उनसे पूछा कि वह क्या चाहती हैं, तो माता पार्वती ने स्पष्ट कहा कि वह भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करना चाहती हैं।

पार्वती ने कहा कि उनके गुरु नारदजी ने उन्हें तपस्या का मार्ग बताया है। वह शिवजी को प्राप्त करने के लिए करोड़ों जन्मों तक तपस्या करने को तैयार हैं। उनकी अटूट भक्ति और संकल्प देखकर सप्तऋषि भी नतमस्तक हो गए।

इसके बाद सप्तऋषियों ने भगवान शिव के पास जाकर माता पार्वती की तपस्या और उनके संकल्प के बारे में बताया। माता पार्वती की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव बारात लेकर पहुंचे और दोनों का विवाह संपन्न हुआ।

महंत ने कहा कि मनुष्य के भीतर भगवान ने अकल्पनीय शक्ति प्रदान की है। सच्ची भक्ति, तपस्या और दृढ़ संकल्प के बल पर भगवान की प्राप्ति की जा सकती है।

कथा के शुभारंभ से पूर्व देवी के 108 मंगल नामों से अर्चना की गई। कथा का आयोजन 20 अगस्त तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक किया जा रहा है।


जीणमाता के जन्मोत्सव पर झूम उठे श्रद्धालु

इससे पहले शनिवार को कथा स्थल पर जीणमाता का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जैसे ही घांघू के महाराज गंगोसिंह चौहान के घर जीणमाता का अवतरण हुआ, कथा स्थल पर खुशी की लहर दौड़ गई।

श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं और भक्ति में भावविभोर होकर नृत्य किया। मां जीण के अवतरण के अवसर पर कथा स्थल पर केक भी काटा गया। पूरा वातावरण जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठा।


कथा स्थल पर लगा निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर

जीणमाता कथा के साथ रविवार को निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर भी लगाया गया। शिविर का शुभारंभ कथावाचक महंत डॉ. करणीप्रताप महाराज ने किया।

शिविर में 350 लोगों की आंखों की जांच की गई। इनमें से 280 लोगों को चश्मे के लिए चयनित किया गया। चयनित लोगों को 20 अगस्त को निशुल्क चश्मे वितरित किए जाएंगे।

वहीं, जांच के दौरान 25 मरीजों का आंखों के ऑपरेशन के लिए चयन किया गया। इन मरीजों के जयपुर में निशुल्क ऑपरेशन किए जाएंगे।


शिविर में सताक्षी आई हॉस्पिटल जयपुर के स्टाफ के साथ डॉ. रोहिणी शर्मा और डॉ. गिरिजा चारण ने सेवाएं दीं। शिविर के आयोजन में गोविन्द सिंह करीरी ने सहयोग किया।

जीणमाता की कथा के साथ धार्मिक आयोजन और निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर ने श्रद्धालुओं के बीच सेवा और भक्ति का संदेश भी दिया।