हरितालिका व्रत सोमवार को ही श्रेयस्कर है
हरितालिका व्रत के निर्णय में चतुर्थी युता तृतीया ही ग्राह्य है यह शत-प्रतिशत सत्य - शास्त्रीय वचन हैं।-
हरितालिका व्रत निर्णय में तृतीया तिथि चाहे "खर्व" हो "दर्प" हो या "हिंस्र" तीनों परिस्थितियों में चतुर्थी युता अर्थात् चतुर्थी स्पर्शा अर्थात् चतुर्थी विद्धा अर्थात् पराविद्धा ही ग्राह्य है।
चाहे तृतीया क्षयतिथि हो या वृद्धितिथि या सामान्य तिथि हो, यह स्वत: स्पष्ट है।
संवत् 2085, 2086 में भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि क्षय है ऐसी स्थिति में द्वितीयायुता तिथि सर्वविध श्रेयस्कर है क्योंकि उन वर्षों में भी तृतीया तिथि चतुर्थी विद्धा ही है। इन वर्षों में द्वितीया विद्धा का लेशमात्र भी दोष नहीं है। क्योंकि कर्म काल व्यापिनी तृतीया तो मध्याह्न में रहेगी ही।
विद्वज्जन विराजमान हैं चर्चा परिचर्चा करना पृथक् विषय है और समुचित निर्णय करना पृथक्।
अतः हरितालिका व्रत प्रत्येक परिस्थिति में 14 सितम्बर सोमवार को ही श्रेयस्कर है। यदि किसी स्थान विशेष पर 14 सितम्बर को लेशमात्र भी तृतीया नहीं हो तो ही 13 सितम्बर को होगा अन्यथा नहीं।
कहा भी है -
...कर्त्तव्यागणसंयुता।
और भी-
...परदिने स्वल्पापि चतुर्थीयुतैव ग्राह्या।
मुहूर्त मात्राऽपि का अर्थ लेशमात्र ग्रहण करना ही होगा।
पंडित कौशल दत्त शर्मा
सेवानिवृत्त प्राचार्य- संस्कृत शिक्षा
नीमकाथाना राजस्थान
9414467988
