Indresh Ji Maharaj


सीकर। अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक इन्द्रेश जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को जीवन की ऐसी सीख दी, जो हर व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि क्षमा सबसे बड़ा दंड है और क्रोध में लिया गया निर्णय जीवन को नुकसान पहुंचा सकता है। महाराज ने गौसेवा को सनातन धर्म का आधार बताते हुए कहा कि गाय दुखी है तो जप, तप, यज्ञ और कथा की सार्थकता पर विचार करना चाहिए।

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सीकर में स्व. महेश जी सिंधी की पावन स्मृति में 

श्री गोविंदम में आयोजित महेशम श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन भक्त प्रहलाद चरित्र और भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा सुनाई गई। इन्द्रेश जी महाराज के भावपूर्ण प्रवचनों और भजनों से पूरा कथा पांडाल भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे।

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क्रोध में कभी न लें फैसला, एक गलती बिगाड़ सकती है जीवन

इन्द्रेश जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को क्रोध की अवस्था में कभी कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए। क्रोध व्यक्ति के विवेक को नष्ट कर देता है। ऐसे में लिया गया फैसला उसके रिश्तों, भविष्य और जीवन को नुकसान पहुंचा सकता है।


उन्होंने कहा कि जब क्रोध आए तो मौन धारण कर लेना चाहिए। व्यक्ति को परिस्थितियों के अनुसार नहीं, बल्कि अपने संस्कारों और सिद्धांतों के अनुरूप जीवन जीना चाहिए। परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन अच्छे संस्कार और सिद्धांत ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान होते हैं।

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महाराज ने कहा कि या तो चिंता छोड़ दो या फिर भगवान को सौंप दो, दोनों एक साथ नहीं रह सकते। जीवन में विश्वास, धैर्य और संयम रखना जरूरी है।


क्षमा से बड़ा कोई दंड नहीं, कर्मों का हिसाब जरूर होता है

इन्द्रेश जी महाराज ने कहा कि इस संसार में क्षमा सबसे बड़ा दंड है। बदले की भावना से जीवन नहीं जीना चाहिए, क्योंकि प्रकृति हर कर्म का हिसाब रखती है। आज नहीं तो कल, व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है।


हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध को बढ़ावा देना उचित नहीं है। अपराध करने वाले को उसके कर्मों के अनुरूप दंड मिलना भी आवश्यक है।

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महाराज ने भगवान की करुणा का उदाहरण देते हुए कहा कि ठाकुर जी हमें प्रतिदिन क्षमा करते हैं, इसलिए मंदिरों के द्वार हमेशा खुले रहते हैं। यदि भगवान भी हमारे प्रत्येक कर्म का हिसाब उसी क्षण लेने लगें तो मनुष्य के लिए कोई आश्रय नहीं बचेगा।


गाय दुखी है तो जप-तप और यज्ञ भी व्यर्थ, इन्द्रेश जी महाराज ने बताया गौसेवा का महत्व

कथा के दौरान गौ-महिमा का वर्णन करते हुए इन्द्रेश जी महाराज ने कहा कि गाय पूरे विश्व की माता है और मां से बड़ा कोई नहीं होता। गाय सनातन धर्म की जान है।


उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गौसेवा का विशेष महत्व है। कोई व्यक्ति कितने भी जप, तप, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान क्यों न कर ले, लेकिन यदि उसके आसपास गाय दुखी है तो उसे अपनी साधना की सार्थकता पर विचार करना चाहिए।

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महाराज ने श्रद्धालुओं से गौसेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाने और धर्म के साथ-साथ करुणा एवं सेवा के भाव को अपनाने का आह्वान किया।


प्रहलाद की अटूट भक्ति के आगे हार गया अत्याचार

श्रीमद्भागवत कथा में भक्त प्रहलाद के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि प्रहलाद ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान विष्णु के प्रति अपनी आस्था को कमजोर नहीं होने दिया।


अत्याचार, भय और अनेक बाधाओं के बावजूद उनकी भक्ति अडिग रही। भक्त प्रहलाद की कथा यह संदेश देती है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। भगवान अपने सच्चे भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।


प्रहलाद चरित्र के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा के दौरान भगवान के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का संदेश दिया गया।


वामन अवतार की कथा ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

इन्द्रेश जी महाराज ने भगवान विष्णु के वामन अवतार का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने राजा बलि की दानशीलता, भगवान वामन के आगमन और तीन पग भूमि मांगने के प्रसंग को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।

महाराज ने बताया कि भगवान वामन ने अपने विराट स्वरूप से तीन पग में संपूर्ण सृष्टि को नाप लिया। यह प्रसंग भगवान की दिव्यता, राजा बलि के दान और समर्पण की भावना को दर्शाता है।


कथा के दौरान भजनों और हरि नाम संकीर्तन पर श्रद्धालु झूम उठे। पूरा पांडाल भगवान के जयकारों से गूंजता रहा।


संत-महात्माओं और अतिथियों की रही विशेष उपस्थिति


कथा के तीसरे दिन हनुमानगढ़ी अयोध्या धाम के महंत चंद्रमा दास जी महाराज, लोहार्गल पीठाधीश्वर अवधेशाचार्य जी महाराज एवं पूर्व विधायक राजकुमारी शर्मा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।


इस अवसर पर नरेश सिंधी ने सपत्नीक इन्द्रेश जी महाराज का सम्मान किया। कार्यक्रम का मंच संचालन विष्णु पारीक ने किया।


मीडिया प्रभारी संजय मोर ने बताया कि कथा में दिनेश बियानी, कपिल मंगनानी, योगेश गुप्ता, सत्य सोमानी, मनीष काबरा, मुरारी बियानी, राहुल तिवाड़ी, नरपतसिंह, मनोज पंसारी, संजय शर्मा, अशोक शर्मा, मुकेश भाटीवाड़ा, सुशील मटोलिया, राजेंद्र खंडेलवाल,कमल डोलिया, विक्रम वाहिदपुरा, राजेश दोदराजका, राधेश्याम टांक ,चितरंजन सिंह जी, विशाल जी भाई साहब, रामेश्वर जी रणवा, गौरव सोमानी, ज्योति तनवानी, स्वाति बियानी, पायल नारवानी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, मातृशक्ति और श्रद्धालु मौजूद रहे।


भक्ति और हरि नाम संकीर्तन से गूंजा कथा पांडाल


श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्ति गीतों, हरि नाम संकीर्तन और धार्मिक जयघोष से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।

इन्द्रेश जी महाराज के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को क्षमा, संयम, गौसेवा और अटूट भक्ति का संदेश दिया। कथा में सुनाए गए प्रहलाद चरित्र और वामन अवतार के प्रसंगों ने भक्तों के मन में भक्ति और धर्म के प्रति श्रद्धा को और गहरा किया।