शारदीय नवरात्र का आठवां दिन, यानी महाष्टमी का पावन पर्व, जगतजननी मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप 'मां महागौरी' को समर्पित है। मां का यह रूप अत्यंत शांत, उज्ज्वल और पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इनकी आराधना करने से भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि का वास होता है। इस दिन महागौरी पूजा के साथ ही कन्या पूजन (कंजंक) का भी विशेष विधान है।
कौन हैं मां महागौरी? (स्वरूप)
मां महागौरी का रूप अत्यंत गौर वर्ण (श्वेत) और सौम्य है:
वर्ण व वस्त्र: इनका वर्ण पूर्णतः शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल के समान सफेद है। मां ने समस्त वस्त्र और आभूषण भी श्वेत ही धारण किए हैं, इसलिए इन्हें 'श्वेतवर्षा' भी कहा जाता है।
सवारी: मां महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है।
भुजाएं: इनकी चार भुजाएं हैं। ऊपर वाला दाहिने हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल सुशोभित है। ऊपर वाला बाएं हाथ डमरू लिए हुए है और नीचे वाला हाथ वरद मुद्रा में रहता है।
मां महागौरी का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व
पाप मुक्ति और शुद्धि: मान्यता है कि कठिन तपस्या के कारण मां का रंग काला पड़ गया था, तब भगवान शिव ने गंगा जल से उनका अभिषेक किया, जिससे उनका शरीर बिजली के समान कांतिवान और अत्यंत गौर हो गया। इनकी पूजा से मन के सभी मैल और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
शुक्र ग्रह का नियंत्रण: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां महागौरी का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है। इनकी उपासना से कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है और जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं, ऐश्वर्य व सौंदर्य की प्राप्ति होती है।
कन्या पूजन का महत्व: महाष्टमी के दिन कन्याओं को मां दुर्गा का प्रत्यक्ष स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। इससे माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं और घर में अखंड सौभाग्य व आरोग्यता का आशीर्वाद देती हैं।
अष्टम दिवस की पूजन विधि एवं कन्या पूजन (क्रमबद्ध प्रक्रिया)
प्रातः स्नान व वस्त्र: प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इस दिन बैंगनी (Purple) या सफेद रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजा स्थल की शुद्धि: मंदिर की साफ-सफाई कर गंगाजल छिड़कें। चौकी पर मां महागौरी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित कर दीप प्रज्वलित करें।
पुष्प व श्रृंगार अर्पित करें: मां को रोली, अक्षत, सिंदूर और सफेद या लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। मां को सुहाग का संपूर्ण सामान (चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी आदि) भेंट करें।
प्रिय भोग: मां महागौरी को भोग के रूप में हलवा, पूरी, काले चने और नारियल का प्रसाद अत्यंत प्रिय है।
कन्या पूजन (विशेष): इस दिन 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की कन्याओं और एक बटुक (बालक) को आदरपूर्वक आमंत्रित करें। उनके चरण धोकर उन्हें आसन पर बैठाएं, भोजन (हलवा-पूरी-चना) कराएं और उपहार या दक्षिणा देकर विदा करें।
आरती: दुर्गा सप्तशती के मध्यम चरित्र का पाठ या हवन करें और अंत में कपूर या घी के दीपक से मां की आरती संपन्न करें।
मां महागौरी के सिद्ध मंत्र और प्रार्थना
पूजा के समय इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें:
ध्यान मंत्र:
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
मूल मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्यै नमः॥
प्रणाम मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
नोट: महाष्टमी का व्रत और कन्या पूजन साधक के जीवन के समस्त संतापों को दूर कर सुखद भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। आप सभी को महाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!
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लेखक: [पंकज ओझा RAS ,धर्म ध्वजा रक्षक]
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