करोड़ों सूर्य ग्रहण, हज़ारों अमावस्या का फल मिलेगा एक दिन में-
व्यतिपात योग की महिमाऔर इस दौरान किए जाने वाले जप, तप और दान का महत्व..
इस दिन साधना करने का फल हज़ारों अमावस्या और करोड़ों सूर्य ग्रहणों के बराबर मिलता है।
व्यतिपात योग का महत्व और समय-
अतुलनीय फल: व्यतिपात योग में साधना करने से 1,000 अमावस्या और 100 करोड़ सूर्य ग्रहण के समय किए गए जाप के बराबर फल मिलता है.
तारीख और समय: अप्रैल 2026 में यह योग 6 अप्रैल दोपहर 3:25 बजे से शुरू होकर 7 अप्रैल शाम 4:17 बजे तक रहेगा
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फलों का विभाजन: इस 25 घंटे के समय को चार भागों में बांटा गया है:-
आरंभ काल (पहले 8 घंटे)▫️1 लाख गुना फल...
▫️बढ़ोतरी काल (रात्रि 12:30 से सुबह 9:14): 1 करोड़ गुना फल
◽पतन काल (सुबह 9:14 से दोपहर 1:22): 100 करोड़ गुना फल
◻️अंतिम भाग (दोपहर 1:30 से शाम 4:17): इस दौरान किया गया जाप और दान अक्षय (कभी नष्ट न होने वाला) हो जाता है.
क्या करें और क्या न करें?
क्या करें: जप, मौन, व्रत, साधना, तर्पण और दान करें
🔸क्या न करें: तुलसी के पत्ते न तोड़ें
तामसी भोजन (लहसुन, प्याज) न खाएं
नया व्यापार, कर्ज लेना, शादी-ब्याह की चर्चा, यात्रा या कोई भी मांगलिक कार्य (जैसे भूमि पूजन) इस दिन वर्जित है
तर्पण विधि (7 अप्रैल की सुबह)
वैशाख मास में सुबह सूर्योदय से पहले उठकर तर्पण करना बहुत जरूरी है
यमराज को जल: सबसे पहले यमराज को जल देना चाहिए। तांबे के लोटे में जल, पुष्प और कुशा लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें
पितृ तर्पण: यमराज और भीष्म पितामह के बाद अपने पूर्वजों (पितृ पक्ष और मातृ पक्ष) को जल दें। जल देते समय 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप कर सकते हैं
विशेष निर्देश
तर्पण करने तक कुछ भी न खाएं-पिएं (चाय भी नहीं)
*इस दिन किया गया दान अक्षय फल देने वाला होता है, विशेषकर 7 अप्रैल को सुबह 9:00 बजे के बाद
करोड़ों सूर्य ग्रहण, हज़ारों अमावस्या का फल मिलेगा एक ही दिन में*
पंकज ओझा- कैलाशी
धर्मध्वजा वाहक. 🚩
